
मुंबई के मरीन ड्राइव के बोहोत ही पास मंत्रालय है। मंत्रालय में ६ माला पर मुख्यमंत्री का दफ्तर है. ६ माला पर किसी भी व्यक्ति को आसानी से नहीं पोहचपोहचा दिया जाता। वह एक हाई सिक्योरिटी जोन है। वह पर तत्कालीन मुख्यमंत्री (१९९३ )” शरदचंद्र पवार”. मुख्यमंत्री के ही ऑफिस के बगल में प्रशासनिक यूनिट होता है जहा मुख्यमंत्री का पूरा स्टाफ बैठा होता है उसी यूनिट में एक व्यक्ति उस दिन वह पोहचा। वह व्यक्ति जोरो जोरो से कुछ बोल रहा था। और उसने ुचा ुचा एक शब्द बोला ” नंगा क्र दूंगा ,मुझसे भिड़ना मत ;सच्चाई बता दूंगा , कोण कोण इन्वॉल्व था सब बता दूंगा . मुझसे भिड़ना मत। वह व्यक्ति और कोई नहीं यह था महाराष्ट्र से एक कविधानसभा से आया हुआ विधायक और इसका नाम था “मौलाना झिआउद्दीन भुकारी ” यह मुस्लिम लीग पार्टी का विधयक था। इसके पहले शरद पवार से काफी अच्छे सम्बन्ध थे. पर यह शक्श उस दिन नाराज इस लिए था की बगल के ऑफिस में बैठे हुए शरद पवार ने इससे मिलने से िकार क्र दिया था। लेकिन यह बाँदा ऐसा क्यों बोल रहा ता इसके पीछे के कारन क्या थे.

यह पूरा वारदात तत्कालीन गृहमंत्री को बताया गया। यह सुनकर गृहमंत्री बोहोत टेंशन में आगये की अगर भुकरि मुँह खोल देंगे तो महरास्ग्त्र में बानी बनाई सरकार टूट जाएंगी. इसलिए गृहमंत्री ने इस मामले में बोहोत बारीकी से ध्यान दिया और भुकरि नाम का कटा बिच में से हटाने का प्रयास किया। इसके लिए अरुण गवली को सुपारी दी गयी अरुण गव्काली और मुस्लिम गंगो में पाहिले से ही मुठभेड़ और तनाव जा ऋ ही रहता था जिसका फायदा गृहमंत्री और शरद पवार ने उठाया और अरुण गवली के शार्प शूटर राजू फिलिप के द्वारा अप्रैल १९९४ में मौलाना जहिआउद्दीन भुकरि को मार गिराया। इसके साथ ही वो सच्चाई। वह राज जो भुकरि बताना कहते थे जिसके कारन उनकी जान ले ल गयी। क्या थे १९९३ मुंबई बॉम्बिंग्स के राज ? यह सब राज ही रह